वो बेवफा हो गय

 



थोड़ी -थोड़ी धुप थी, थोड़ी सी छाँव थी।

मुस्कुराती मेरी सुबह, तो रोती मेरी शाम थी।

आँखे जो भर आई मेरी, आँसू उसके ही नाम थी।

गुदगुदाती मेरी सुबह, तो दिल दुखाती मेरी शाम थी।


अपनी हसी, अपनी खुशी, अपने आँसू, वो सब बंया कर गये।

किसी और को आने दिया अपने जिन्दगी में, और हमें खुद से जुदा कर गये।

जिन आँखो में हर पल खुशी ही नजर आती थी,

आज उन आँखों से आँसू भी रुसवा कर गये।


तू आई तो जिंदगी मुस्कुराने लगी थी।

तुम्हें गाने तो नहीं आता था, फिर भी तू गुनगुनाने लगी थी ।

ना चाहकर भी तू मेरे पास आने लगी थी।


तेरी सांसो से मेरी सांसो की वो डोर, ना जाने कैसे टुट गई।

पास मेरे आई फिर दूर हो गई।

पर सुन जरा।

कमी तो तुझे मेरी भी खलेगी, प्यार तू मुझसे तब भी करेगी।

भले ही जिन्दगी तेरी कोई और हो जाए।

साँसे तो मेरे नाम की ही भरेगीं।


जब वो आई मेरी जिन्दगी में तो खुदा हो गयी।

तकदीर के नाम पर जुदा हो गयी।

मासूमियत थी हमारी या बदनसीबी ।

हम समझे थे जिसको वफा करने वाली,

पर वो बेवफा हो गयी। ………………


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